चाणक्य विचार | Best Chanakya Thoughts |

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अर्थशास्त्र के रचियता चाणक्य महान विद्वानों की श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ स्थान रखते हैं। इन्होंने मौर्य साम्राज्य की स्थापना करके अखण्ड भारत का निर्माण किया था। चाणक्य उर्फ कौटिल्य द्वारा रचित अर्थशास्त्र के अलावा इनकी चाणक्यनीति भी काफी चर्चित है। इन्होंने अपने ज्ञान को स्वयं तक सीमित नहीं रखा बल्कि चाणक्य नीति में लिखकर अपनी आने वाली पीढ़ियों को भी दिया। अपनी कूटनीति के लिए प्रसिद्द चाणक्य ने चाणक्यनीति में जीवन के लिए उपयोगी कई ऐसी बातों का जिक्र किया है, जिन्हें अपनाने से भविष्य में आने वाली परेशानियों से बचा जा सकता है। या यूं कहें कि इन पर अमल करना व्यक्ति के लिए फायदेमंद साबित होता है।तो चलिए चाणक्य के उन 10 अनमोल विचारों की सूची के बारे में जानते हैं जिससे आप अपने निराशा भरे जीवन को खुशियों और उम्मीदों से भर सकते हैं।

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  1. किसी भी व्यक्ति को अधिक ईमानदार नहीं होना चाहिए। क्योंकि जंगल में सीधे तने वाले वृक्ष ही सबसे पहले काटे जाते हैं। इसी प्रकार ज्यादा ईमानदार व्यक्ति को भी सबसे अधिक कष्ट उठाने पड़ते हैं।
  2. जो व्यक्ति किसी भी प्रकार का कार्य करने में संकोच नहीं करता अर्थात मेहनत करने से नहीं घबराता है वो हमेशा आर्थिक रूप से संपन्न व सुखी रहता है। यदि मेहनत की जाए तो हर असंभव कार्य को संभव किया जा सकता है। जीवन में सफल वही होता है जो अपनी सूझबूझ से अपने कार्यों को अंजाम देता है।
  3. हर मित्रता के पीछे कुछ ना कुछ स्वार्थ अवश्य छिपा होता है। संसार में ऐसी कोई मित्रता नहीं है जिसके पीछे स्वार्थ ना हो। धनवान व्यक्ति के कई मित्र और सगे-संबंधी होते हैं। ये बात कड़वी है लेकिन सत्य है।
  4. हमें अपनी राज की बातें कभी-भी किसी को नहीं बतानी चाहिए। ये आदत व्यक्ति को बर्बाद कर सकती है। किसी को सुनने से धर्म का ज्ञान होता है, द्वेष दूर होता है और ज्ञान की प्राप्ति होती है। इस तरह माया की आसक्ति भी दूर हो जाती है।
  5. बीता हुआ समय कभी भी वापस नहीं आता है। इसलिए यदि आपसे कोई गलत कार्य हो गया है तो आप उसकी चिंता न करके वर्तमान को सुधारकर भविष्य को संवारना चाहिए।
  6. अगर कोई सांप जहरीला नहीं होता है फिर भी वह फुंफकारना नहीं छोड़ता। इसी प्रकार अगर कोई व्यक्ति कमजोर हो फिर भी उसे स्वयं को ताकतवर दिखाना चाहिए। हमें कभी भी भय से भयभीत नहीं होना चाहिए। जब भी भय करीब आए उस पर आक्रमण कर दें।
  7. एक बेकार राजा होने से तो बेहतर है कि उस राज्य का कोई राजा ना हो। एक पापी का मित्र होने से बेहतर है कि वो बिना मित्र का हो। एक मुर्ख का गुरु होने से बेहतर है कि वो बिना शिष्य वाला हो। एक बुरी पत्नी होने से बेहतर है कि बिना पत्नी वाला हो।
  8. एक लालची आदमी को वस्तु भेंट कर, कठोर आदमी को हाथ जोड़कर, मूर्ख को सम्मान देकर और विद्वान आदमी को सच बोलकर संतुष्ट करें। इसके साथ ही जिस व्यक्ति के पास दया और धर्म नहीं है उससे दूर ही रहना चाहिए।
  9. जब तक शरीर स्वस्थ और आपके नियंत्रण में है। उस समय आत्म साक्षात्कार के लिए उपाय अवश्य ही कर लेना चाहिए, क्योंकि मृत्यु के पश्चात कोई कुछ भी नहीं कर सकता।
  10. चाणक्य ने कहा है किसी को अपने साथ हुए अपमान या बोले गए अपशब्दों के बारे में नहीं बताना चाहिए। क्योंकि ऐसी बातें दूसरों को पता चलेगा तो उनके सामने प्रतिष्ठा कम होगी।

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